<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446</id><updated>2012-01-15T05:31:52.680+05:30</updated><category term='ख़ालिस बकैती'/><category term='ब्लॉग'/><title type='text'>ख़ालिस बकैती</title><subtitle type='html'>सबकी बात वचन है प्यारे....मेरी बात बकैती       ।                                                                                      
आज के जमाने में शुद्धता की कोई गारंटी नहीं, लेकिन मेरा वादा है बकैती एकदम ख़ालिस मिलेगी</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>10</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-4938501510884267099</id><published>2011-08-21T09:31:00.004+05:30</published><updated>2011-08-21T09:52:43.895+05:30</updated><title type='text'>खामोशी से पहले का शोरगुल ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-nroMnDgkjgw/TlCDc6MU70I/AAAAAAAAADc/djaTOh4SJs8/s1600/1add1_anna_protest_pic_06_295.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 200px; height: 136px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-nroMnDgkjgw/TlCDc6MU70I/AAAAAAAAADc/djaTOh4SJs8/s200/1add1_anna_protest_pic_06_295.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5643154865775767362" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक आसान सी बात है कि जब घाव मामूली हो तो बिना मरहम के भी रहा जा सकता है...लेकिन जब पीड़ा असहनीय हो तो दवा के लिए बेचैनी बढ़ जाती है...हर दवा इस्तेमाल की जाती है...भले वो दर्द खत्म करने की बजाय थोड़ा कम करने वाली ही क्यों न हो...यही पूरा फार्मूला है सरकार का...जो पूरे अन्ना प्रकरण में अपनाया गया है....सरकार भ्रष्टाचार रूपी इस घाव को इतना बड़ा कर देना चाहती है कि जनता त्राहीमाम कर दे...ऐसे में घाव भरने की दवा के बजाय दर्द कम करने की दवा भी कारगर साबित होगी...सरकार ने इसके लिए तैयारी भी शुरु कर दी है...कांग्रेस की मुखिया देश के बाहर हैं...लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि वो पूरे मामले से अनभिज्ञ हैं...उन्हें पल पल की खबर है...लेकिन वो मौन हैं....क्योंकि यही मौन तो विजय का मूलमंत्र है...मैडम आंएगी और बोलेंगी भी...लेकिन थोड़ा वक्त दीजिए...अभी अपने दर्द को और बढाइए...अभी पूरे देश का ध्यान इस पर आने दीजिए...इतना, कि हर तबाही इस मुहिम के आगे छोटी नजर आने लगे...फिर देखिए..एक चमत्कार होगा...मैडम आएंगी, और सरकार की तरफ से की गई सभी गलतियों का अफसोस मनाते हुए सबको शटअप कर देंगी...हो सकता है सारा ठिकरा मनमोहन पर फोड़कर राहुल बेटे को कुर्सी सौंप दी जाए...जो आपको आपका बिल देने पर राजी हो जाएंगे...और इस उदारता के बदले आप भी थोड़े बहुत संशोधन की इजाजत तो दे ही देंगे...लेकिन इसके साथ सरकार को जो आप देंगे, उसके लिए ही तो कांग्रेस ने गोटियां बिछा रखी हैं...आप सरकार की सारी गलतियां भूल जाएंगे...आप सरकार को फिर से सर आंखों पर बिठाएंगे...फिर से चुनाव होगा, आपका हाथ कांग्रेस के साथ होगा...भ्रष्टाचार के खिलाफ आपको एक शस्त्र मिल जाएगा...आप लड़िएगा उसके साथ भ्रष्टाचार मिटाने को...सरकार शासन करेगी....और अगले कई सालों तक आप कुछ नहीं बोल पाएंगे..क्योंकि आप जब बोलेंगे, सरकार कहेगी हथियार मांगा था, दे तो दिया... अब लड़ो...और आप खामोश हो जाएंगे....बस यही तो चाहती है सरकार...और शायद उसी खामोशी के पहले का शोरगुल है अन्ना का आंदोलन...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अन्ना हजारे देश में भ्रष्टाचार मिटाने के लिए अपनी पूरी टीम के साथ लगे हुए हैं...जाहिर है इरादा नेक है शायद यही वजह है कि देश उनके साथ खड़ा है...लेकिन क्या जो दिख रहा है वही सच है...क्या सच में देश से भ्रटाचार खत्म हो जाएगा...क्या भ्रष्टाचारियों की कांग्रेस का सत्ता से सफाया हो जाएगा...सवाल बहुत से हैं...देश को उम्मीदें भी बहुत हैं....लेकिन ये उम्मीद फिलहाल सपना भर है...और पूरा होने से पहले सपने को सच का तमगा नहीं दिया जा सकता...जानिए सरकार और अनशन का सच मेरी नजर से....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुछ सवाल&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने पर सिर्फ कांग्रेस का ही नुकसान है ?&lt;br /&gt;क्या न्यायपालिका कांग्रेस की है जो उसे शामिल करने पर उसे तकलीफ हो रही है ?&lt;br /&gt;क्या सरकार अन्ना के आंदोलन का अंजाम नहीं समझ पा रही है ?&lt;br /&gt;क्या सरकार पूरी तरह से कन्फ्यूज है कि क्या करें, क्या ना करें ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऐसे ही ढेरों सवाल हैं...लेकिन जवाब सिर्फ एक है...सरकार का कोई भी कदम कोई भी बयान महज झल्लाहट में उठाया नहीं है...इसके पीछे एक पूरी गणित चल रही है...गणित खुद को न सिर्फ बचाने की बल्कि देश के लोगों में खुद को फिर से स्थापित करने की...&lt;br /&gt;जरा सोचिए आपातकाल में गिरफ्तार किए नेताओं को जब जेल की बजाय गेस्ट हाउस में रखा गया...तो अन्ना को जेल में रखने की जरूरत क्या थी...पिछले कई मामलों में मीडिया को मैनेज करने वाली सरकार इस बार क्यों नहीं मैनेज कर पा रही है...जबकि पहली बार मीडिया सरकार के खिलाफ एक पार्टी बनती दिख रही है...इसके पीछे सरकार को अपना हित दिख रहा है...&lt;br /&gt;दरअसल कांग्रेस जानती है कि भ्रष्टाचार और महंगाई ने देश के लोगों को उससे दूर कर दिया है....ऐसे में अगर अन्ना का आंदोलन नहीं भी होता तो भी कांग्रेस की अगले चुनावों में सत्ता वापसी मुश्किल थी...बस सरकार ने इसी से बचने का रास्ता निकाला...और कांटे से कांटे निकालने में जुट गई है...और अन्ना का पूरा आंदोलन और सरकार का हमला इस सियासी बिसात की छोटी सी चाल भर है...सरकार बड़े ही धैर्य के साथ एक एक चाल चल रही है....ताकि चेक और मेट से पहले जीत सुनिश्चित हो जाए...&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-4938501510884267099?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/4938501510884267099/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=4938501510884267099' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/4938501510884267099'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/4938501510884267099'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='खामोशी से पहले का शोरगुल ?'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' 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/&gt;वो गुनहगार है, कातिल है&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;br /&gt;वो घूमता है खुलेआम&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;br /&gt;वो जानता है कत्ल करने के तरीके ढेरों&lt;br /&gt;वो प्यार से लेता है सबकी जान&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;br /&gt;उसके पास जान लेने के औजार बहुत सारे हैं&lt;br /&gt;जिन्हें वो मारता है, सभी उसके प्यारे हैं&lt;br /&gt;वो छोड़ता नहीं है, कत्ल का कोई भी सुराग&lt;br /&gt;पर मैं जानता हूं, वो कातिल है&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उसकी आंखों में तेज धार एक कटारी है&lt;br /&gt;उसकी जुबान पर मीठी सी छुरी प्यारी है&lt;br /&gt;वो जिसे चाहे, कुछ इस तरह नचाता है&lt;br /&gt;जैसे यमदूत मौत बनकर पास आता है&lt;br /&gt;वो मार डालेगा सबको&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;br /&gt;वो गुहगार है, कातिल है&lt;br /&gt;गिरफ्तार करो&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-3931931195131581215?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/3931931195131581215/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=3931931195131581215' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/3931931195131581215'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/3931931195131581215'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='गिरफ्तार करो...'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' 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/&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;दास्तान-ए-चवन्नी&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;मैं चवन्नी हूं...मैं अगर रुपए से निकाल ली जाती थी ...तो रुपया अधूरा रह जाता था....लोगों की जेब में लंबे वक्त मेरा राज रहा है...यकीन नहीं हो तो अपने बड़े-बूढ़ों से पूछ लो...मुझे लेकर वो अपने बच्चों के साथ पूरे मेले की शान का नजारा करते थे...मुझे खर्च करके वो खान पान भी कर लिया करते थे...हालांकि मुझसे छोटे भाई बहन भी थे...जो पहले ही मिटा दिए गए....लेकिन उनके मिटने का मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ा...क्योंकि मेरी अहमियत कुछ खास थी...मैं रुपए का चौथा हिस्सा थी...लेकिन अब मेरा अंतिम वक्त पास है....वैसे पितामह भीष्म की तरह शैय्या पर लेटकर अपने मरने का इंतजार तो मैं बहुत पहले से कर रही थी...लेकिन मौत इतनी पीड़ा दायक होगी ये मैनें सोचा नहीं था...मुझे मिटाने वालों ने मुझे खत्म करने से पहले ये भी नहीं सोचा, कि ना जाने कितनी बार रुपए में मुझे मिलाकर उन्होंने खुद औऱ परिवार की तरक्की के लिए सवा रुपए का प्रसाद चढ़ाया होगा ....मरने से पहले ना जाने क्यों पुरानी बातें याद आने लगी हैं...मुझे कई बार नीचा दिखाने की कोशिश की गई...समाज में सबसे निकम्मे को मेरा नाम दिया गया और कह दिया चवन्नी छाप...मैं इस अपमान का घूंट पीकर भी जिन्दा रही...क्योंकि मुझे पता था मेरा अतीत...मेरा गौरवशाली अतीत....आज के ज़माने के लोग क्या जानेंगे कि मैंने भी आजादी के लिए लड़ाई की है... महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन से लोगों को जोड़ने के लिए मेरा सहारा लिया...और मैं ही थी उस वक्त सदस्यता की कीमत...उस समय मेरे साथ गांधी का नाम जोड़कर एक नारा भी दिया गया था...'खरी चवन्नी चांदी की, जय बोल महात्मा गांधी की'...आजादी की लड़ी ही वजह थी कि मुझे अंग्रेजों की टकसाल का बंदी बनाया गया...और मुझ पर अंग्रेजी छाप लगा दी गई...मुझे याद है आजादी को वो दिन भी...जब देश झूम रहा था....लेकिन मैं फिर भी अंग्रेजों की बंदी बनी रही...हालांकि जल्द ही लोगों को मेरी सुध आ गई...और आजादी के दस साल बाद 1957 में मुझे अंग्रेजों की दासता से मुक्त करा लिया गया....यही वो दौर था जब कागजों पर मुझे नया नाम भी मिला...इंडियन क्वाइंज एक्ट-1906 में बदलाव करते हुए मेरा नया नाम रखा गया पच्चीस पैसा...क्या दिन थे वो...इसके बाद तो देश में मेरा कद और बढ़ गया...मैं लोगों की आंखों का सपना बन गई...हालांकि कुछ जलने वालों ने उस वक्त भी मुझे मारने की साजिश रचते हुए मुझ पर 1968 में जानलेवा हमला किया था...जिससे उबरने में मुझे चार साल लगे...चार साल बाद 1972 में मैं फिर से आई...और मेरा खूब मान सम्मान हुआ...यही वजह है कि मुझे 1982 में हुए एशियाड खेलों का प्रतीक बनाया गया...मुझे वो दिन भी याद है जब मुझे स्टेनलेस स्टील के कपड़े मिले थे...साल 1988.....क्या दिन थे वो...अब जब अंत समय आ गया है...अनायास ही पुरानी बातें याद आ रही हैं...मेरी आंखों में आंसू है...बहुत लंबा वक्त बिताया है मैंने आपके साथ...अब इजाजत दीजिए एक वादे के साथ...खुद मुझे याद रखिएगा...और अपनी आने वाली पीढ़ियों को बताइएगा.... कितनी प्यारी थी चवन्नी...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-1984248151336744265?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/1984248151336744265/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=1984248151336744265' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1984248151336744265'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1984248151336744265'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title=''/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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किया&lt;br /&gt;एक वो दौर भी था, जब मैं तुम्हारी सोच बना&lt;br /&gt;लेकिन&lt;br /&gt;तुम सबको झुठलाते रहे&lt;br /&gt;तुम्हें लगा मैं सबकुछ भूल जाऊंगा&lt;br /&gt;तुम्हारा प्यार, तुम्हारा दुत्कार&lt;br /&gt;और खुद तुम्हें भी&lt;br /&gt;लेकिन&lt;br /&gt;तुम मेरे लिए कोई कोर्स नहीं थे&lt;br /&gt;जिसे परीक्षा में पास होने के लिए याद करना था&lt;br /&gt;तुम मन थे मेरे&lt;br /&gt;जिसके बिना जिंदा लाश हूं मैं&lt;br /&gt;तुमने छोड़ दिया मुझे&lt;br /&gt;मैं खामोश हूं&lt;br /&gt;तुम्हें दगाबाज भी तो अब नहीं कह सकता&lt;br /&gt;तुन्हारे सामने तो कई बार कहा है&lt;br /&gt;लेकिन&lt;br /&gt;अब लब साथ नहीं देंगे&lt;br /&gt;लेकिन&lt;br /&gt;गुनाह तो हुआ है मेरे साथ&lt;br /&gt;और हुआ है, तो गुनहगार भी होगा&lt;br /&gt;तुम नहीं तो कौन ?&lt;br /&gt;चलो तुम्हारी ही जुबान में कहता हूं&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;हे भगवान ! ये क्या हो गया&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-6992692636699998606?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/6992692636699998606/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=6992692636699998606' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6992692636699998606'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6992692636699998606'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='हे भगवान ! ये क्या हो गया'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-ZZdzZWtJbts/TYyCAQ7KK9I/AAAAAAAAADA/hSdvfDIClKM/s72-c/tear.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-1311789188364001773</id><published>2010-04-07T06:39:00.006+05:30</published><updated>2010-04-12T00:59:55.466+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ख़ालिस बकैती'/><title type='text'>शादी क्यों कर लेती हैं खूबसूरत लड़कियां ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S7vcj5_CxjI/AAAAAAAAACg/z7zHEQyZ-2A/s1600/07sania.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 185px; height: 200px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S7vcj5_CxjI/AAAAAAAAACg/z7zHEQyZ-2A/s200/07sania.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5457197882908263986" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; आपको अटपटा जरूर लग रहा होगा, सोच रहे होंगे कि अजब बेवकूफाना सी बात है..लेकिन हकीकत कुछ ऐसी है...मैं क्या करूं सोच ही ऐसी है...मेरा बस चले तो किसी खूबसूसत लड़की की शादी ही नही होने दूं....आप फिर सोचेंगे कि मैं कितनी घटिया सोच वाला इंसान हूं....लेकिन मैं ऐसा अपने लिए नहीं कह रहा हूं...बल्कि मैं तो खूबसूरत लड़कियों के पक्ष की बात बोल रहा हूं...अब आप ही सोचिए कि शादी से पहले खूबसूरत लड़की के दीवाने कितने होते हैं...हर गली, मोहल्ले में लोग उसके आने जाने का वक्त तकते रहते हैं...उसकी प्यार भरी एक आंख भर उठ जाए तो कई जैकपॉट जीतने का नशा हो जाता है...उस दिन किसी काम में मन नहीं लगता...हर तरफ सिर्फ वो आंखे ही नजर आती हैं....और रात भी उन आंखों को देखते देखते आंखों आखों में बीत जाती है...और अगर उसने प्यार से एक शब्द भी कह दिया, तो कान में पंडित शिव कुमार शर्मा के संतूर की मिठास गूंजने लगती है...हांलाकि इसमें एक लोचा भी है...वो ये, कि ऐसी लड़कियों के मुंह से जो पहला शब्द निकलता है, वो भईया ही होता है...लेकिन हम लोग यानी खूबसूरती के प्रशंसक तो जानते ही हैं...कि आखिर सबके सामने बुलाएगी भी तो क्या कहकर...इसलिए भईया शब्द पर हमलोग ध्यान ही नहीं देते...इसको कुछ इसी तरह से स्वीकार करते हैं....जैसे साला शब्द गाली होते हुए भी गाली की तरह इस्तेमाल नहीं किया जाता...और अगर वही लड़की शादी कर ले, तो उसका चाहने वाला सिर्फ उसका पति ही होता है...वो भी कुछ दिनों तक...और उसके सारे चाहने वाले सिर्फ उसकी चाहत का ही त्याग नहीं करते...बल्कि उसके दुश्मन भी बन जाते हैं...अब उसी मुहल्ले में हमें उसकी आखों में दगाबाजी नजर आती है...शब्दों से सियार की हूं हूं की आवाज सुनाई देती है...पता नहीं ऐसा क्यों कर लेती हैं ये खूबसूरत लड़कियां...अरे बीच का रास्ता भी तो निकल सकता है...अगर शादी करना इतना ही जरूरी है...तो करिए न, कौन रोक रहा है...लेकिन थोड़ा उम्र का ख्याल करके कीजिए... पचास के पार होते ही शादी कर लिए हम कुछ नहीं कहेंगे...आशिकी की कसम...क्योंकि हमको अपने टैलेंट पर पूरा भरोसा है...कि तब तक हम किसी कमसिन को तो खोज ही लेगें...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;ताजा मामला सानिया का है, शोएब से शादी की चर्चा क्या हुई, शुरु हो गया हंगामा...लोग खफा हैं कि सौ करोड़ से ऊपर की आबादी वाले देश में उसे कोई नहीं मिला..जो पाकिस्तानी से शादी करने जा रही है....मैं भी इस बात से बेहद दुखी हूं...और दुख दूर करने के लिए ऐसे भगवान को बीच में ला दिया हूं...जिनका शादी वादी से कोई  खास सरोकार नहीं है...जी हां आप सही सोच रहे हैं, सीधे बजरंग बली से शादी रुकवाने के लिए बोल दिया है...अब मामला शादी ब्याह का है तो देखिए कितना इन्ट्रेस्ट लेते हैं...अब शादी हो गई तो समझिएगा की इन्ट्रेस्ट नहीं लिया...और नहीं हुई तो आप जानते ही हैं कि मेरी बात वो कभी नहीं टालते...लेकिन मैं थोड़ा परेशान भी हूं...सोचता हूं कि अगर, सानिया की शादी टल गई तो भी किसी न किसी से तो शादी होगी ही...और ये भी तय है कि मुझसे तो होने से रही...तो दुख तो बना ही रहेगा...जिसे मेरा नहीं होना है....क्या फर्क पड़ता है कि वो किसकी हो रही है...इसलिए मेरे दिमाग में एक स्कीम आई है...कि क्यों न उसकी शादी परमानेंटली रुकवाने की कोशिश की जाए...क्योंकि वो किसी की हो जाए ये तो मैं बर्दाश्त ही नहीं कर सकता...ऐश्वर्या के बाद बड़ी मुश्किल से अपने आपको संभाला है...ऐसा न हो की इस बार टूट के बिखर ही जाऊं...अब उस दिन की ही बात लीजिए जब सोहराब मिर्जा से सगाई हो रही थी...मुझे तो दिन भी याद है दस जुलाई...मैं कितना बेचैन था...लग रहा था कि कोई मेरी सांस खींच रहा हो...मै अधमरा सा हो गया था...कई महीने तक लगा कोमा में हूं...किसी काम में मन ही नहीं लगा पा रहा था...लेकिन शुक्र है कि सानिया को अक्ल आ गई...या यूं कहें कि मेरी तकलीफ उससे भी नहीं देखी गई..और आखिरकार जनवरी में उसने सगाई तोड़ ही दी...तबसे मैं कितना खुश था...आप सोच भी नहीं सकते...लेकिन बीच में फिर से आ गया मुआं शोएब...लुच्चा कहीं का...सानिया अगर ऐसे ही रहे तो कितना अच्छा होगा...और आपको क्या लगता है हमलोगों को आएशा से कोई हमदर्दी है...अजी बिल्लकुल नहीं...उसको तो हम हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं...आपने तो सुना ही होगा कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है...रही बात सानिया कि वो तो भगवान न करें कभी दुश्मन बने...अभी भी उससे मेरी दुश्मनी थोड़े ही है...बस थोड़ी सी नाराजगी भर है,...यकीन मानिए जल्द ही खत्म हो जाएगी..अपने हाल पर मुझे एक बहुत ही बेहतरीन गीत याद आ रहा है, आप भी तबज्जो दीजिएगा...&lt;br /&gt;&lt;strong&gt; &lt;br /&gt;तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं, &lt;br /&gt;तुम किसी और को चाहोगी तो मुश्किल होगी&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt; &lt;br /&gt; लेकिन इसी गाने की जो अगली लाइन है, वही मेरी प्रेरणा है...मेरी ऊपर की सारी बकैतियों का लब्बो लुआब उसी में है...हो सकता मैं अपनी बात आपको अभी तक समझा नहीं पाया हूं...तो कोई बात नहीं लाइन पढ़िए समझ में आ जाएगा...&lt;br /&gt;&lt;strong&gt; &lt;br /&gt;ये सहारा ही बहुत है मेरे जीने के लिए &lt;br /&gt;तुम अगर अपनी नहीं तो पराई भी नहीं&lt;br /&gt; &lt;/strong&gt;अब आप ही सोचिए,  कि मैं सानिया को कैसे मान लूं कि वो पराई है...  बस शादिया मत होने दीजिएगा...और सानिया ही क्या, किसी भी खूबसूरत लड़की की शादी अगर आप रुकवा सकें...तो प्लीज कोशिश कीजिए...क्योंकि मेरे जैसे तो लाखों सनम हैं...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-1311789188364001773?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/1311789188364001773/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=1311789188364001773' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1311789188364001773'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1311789188364001773'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='शादी क्यों कर लेती हैं खूबसूरत लड़कियां ?'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S7vcj5_CxjI/AAAAAAAAACg/z7zHEQyZ-2A/s72-c/07sania.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-1522947398984216463</id><published>2010-02-26T06:38:00.004+05:30</published><updated>2010-02-26T06:50:52.493+05:30</updated><title type='text'>सुनो !   क्या चाहती है बिटिया</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S4chEabz6EI/AAAAAAAAACQ/oXbL4PFyvcc/s1600-h/SSSSS.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 179px; height: 200px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S4chEabz6EI/AAAAAAAAACQ/oXbL4PFyvcc/s200/SSSSS.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442355034399696962" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आम बजट । एक ऐसा शब्द जो शब्दों से हटकर सबकुछ है... शब्द भले ही आम हो लेकिन इसका ये कतई मतलब नहीं है कि ये खास लोगों को प्रभावित नहीं करता....खूब करता है, बल्कि यूं कहें कि कभी कभी कुछ खास लोगों पर अनुकूल प्रभाव डालता है, और कभी कभी प्रतिकूल तो ज्यादा बेहतर होगा...जहां तक आम लोगों की बात है, तो इसके नाम से ही आपको लग गया होगा कि ये आम लोगों के लिए है...और हकीकत भी कुछ ऐसा ही है...अंतर सिर्फ इतना है कि पूरे बजट में आम इंसान का केवल जिक्र भर ही होता है....फिक्र तो कहीं दिखता ही नहीं....खैर मैं मुख्य विषय से भटक गया...और बजट जैसे गूढ़ विषय पर बात करने लगा .....दरअसल मैं आज बात करने जा रहा हूं चाहतों की...नहीं नहीं, वो चाहत नहीं जो आप समझ रहे हैं...बल्कि हम बात कर रहे हैं उस चाहत की, जो इस बजट में लोग वित्त मंत्री से चाहते हैं...आप भी कुछ चाह रहे होंगे, हम भी कुछ चाह रहे हैं...लेकिन बात एक खास शख्सियत के चाहत की...जो अजीब है....&lt;strong&gt;अजीब इसलिए कि इस चाहत में एक ऐसी मांग शामिल है , जिसकी मांग आज से पहले किसी ने भी वित्त मंत्रालय से नहीं की....&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;शरमिष्ठा मुखर्जी । मशहूर कथक डांसर और प्रणब मुखर्जी की पुत्री...वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की पुत्री...हर नागरिक की ही तरह शरमिष्ठा को भी इस बजट से कुछ उम्मीदे हैं..और वो चाहती हैं कि वित्त मंत्री उसे पूरा करें...और इसीलिए उन्होने वित्त मंत्री के लिए एक खुला पत्र लिखा है...जिसमें उन्होंने अपनी मांगें लिखी है...अब सवाल ये उठता है, कि वित्त मंत्री की पुत्री को अपनी किसी मांग को मंगवाने के लिए पत्र लिखने की क्या जरूरत है...तो इसका जवाब भी शरमिष्ठा ने खुद लिखा है...उन्होंने लिखा है कि घर में मैंने कई बार अपने पिता से इस बारे में बात करनी चाही...लेकिन हर बार उनकी फौलादी निगाहों ने मुझे डरा दिया...और मैं कुछ भी नहीं कह सकी...इसीलिए ये खुला पत्र लिख रही हूं। अपने पत्र में उन्होने कलाकारों के लिए कई तरह की सहूलियतों की मांग की है...और कहा है कि मुझ जैसे कलाकारों पर टैक्स को कम करना चाहिए....लेकिन हमें शरमिष्ठा की इन मांगो से कोई खास सरोकार नहीं है...क्योंकि ऐसी मांग तो हर कोई अपने लिए करता है...खुद हम तो अपनी सहुलियतें चाहते हैं.... लेकिन शरमिष्ठा ने जो आगे मांग की है वो कुछ खास है....&lt;br /&gt;दरअसल शरमिष्ठा चाहती हैं कि उनके वित्त मंत्री पिता इस बार के बजट में&lt;strong&gt; जानवरों पर भी टैक्स लगाएं...मतलब जानवरों से टैक्स वसूलें...वो भी 90 से 95 फीसदी तक...&lt;/strong&gt;आप सोच रहे होंगे कि आखिर जानवर कैसे और कहां से टैक्स देंगे...तो हम बताते हैं कि कैसे होगा ये सब...इसके लिे आप खुद ही पढ़ लीजिए की क्यालिका है शरमिष्ठा ने....और क्या है शरमिष्ठा की मांग....&lt;br /&gt; &lt;br /&gt; “ &lt;strong&gt; मेरी वित्त मंत्री से मांग है कि 90 से 95 प्रतिशत टैक्स उन जानवरों से वसूला जाना चाहिए, जो दिल्ली और एनसीआर की सड़कों पर खुलेआम घूमते हैं। जिनकी जिंदगी का इकलौता मकसद सड़क पर महिलाओं की गाड़ियों का पीछा करना, और उन्हें तंग करना है &lt;/strong&gt; ”  (शरमिष्ठा मुखर्जी )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जी हां... शर्मिष्ठा परेशान हो चुकी हैं, लम्बी-चौड़ी गाड़ियों में बैठकर लड़कियों का पीछा करने और उन्हें छेड़नेवाले रईसजादों से... वैसे शर्मिष्ठा की ये मांग उन लोगों के लिए भी है, जिनके पास लम्बी गाड़ियां तो नहीं, लेकिन हरकतें बिगड़ैल रईसजादों से कम नहीं...  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt; “  &lt;strong&gt;इस तरह का टैक्स सड़कों पर घूमने वाले रोड साइड रोमियो पर भी लगना चाहिए। और साथ ही वैसे लोगों पर भी, जो महिलाओं के साथ छेड़खानी करते हैं &lt;/strong&gt; ”  (शरमिष्ठा मुखर्जी )&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपको लग रहा होगा, कि ये एक बेटी की मांग अपने पिता से है... लेकिन ऐसा नहीं है... ये महज मांग नहीं है...ये एक त्रासदी है जो बयां करती है महिलाओं के हालात को...ये सवाल के कटघरे में खड़ा करती है उस सरकार को...जिसकी जिम्मदारी है महिलाओं की सुरक्षा की, और साथ ही सच्चाई भी बताती है व्यवस्था के नाकामी की.... ये मांग बताती है कि महिलाएं कितनी परेशान हैं, कितनी त्रस्त हैं...और इतनी डरी हुई हैं कि उन जानवरों से छुटकारा पाने के लिए वो किसी से कुछ भी मांगने को मजबूर हैं...शरमिष्ठा जानती हैं कि किसी की &lt;strong&gt;सुरक्षा की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की नहीं है...&lt;/strong&gt;लेकिन क्या करें, जिसकी है वो तो कुछ कर नहीं रहा...सो सोचा वित्त मंत्रालय से ही मांग ले...पिता हैं शायद सुरक्षा की गारंटी मिल जाए....  शर्मिष्ठा की ये मांग देशभर में खासकर देश की राजधानी में महिलाओं की बदहाली बखूबी बयां करती है...ये मांग इसलिए भी खास है कि ये शरमिष्ठा ने मांगा है.....आप खुद ही सोचिए कि देश के वित्त मंत्री की बेटी अगर इन जानवरों से इस कदर परेशान है...तो आम महिलाओं का क्या हाल होता होगा....और वो किसे अपना फरियाद सुनाती होंगी,.....और कौन सुनता होगा उनके इस ‘ &lt;strong&gt;बकवास&lt;/strong&gt; ’ को कि...सड़कछाप मजनुओं ने जीन मुहाल कर रखा है...&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-1522947398984216463?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/1522947398984216463/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=1522947398984216463' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1522947398984216463'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1522947398984216463'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='सुनो !   क्या चाहती है बिटिया'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/S4chEabz6EI/AAAAAAAAACQ/oXbL4PFyvcc/s72-c/SSSSS.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-7895906540708463508</id><published>2008-11-29T08:38:00.000+05:30</published><updated>2008-11-29T09:25:04.446+05:30</updated><title type='text'>बनना नहीं भगवान</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/STC9Dyt73wI/AAAAAAAAABs/dJdf6Sk8pi4/s1600-h/ddddddddddddddddddddddddddddddddddd.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 136px; height: 200px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/STC9Dyt73wI/AAAAAAAAABs/dJdf6Sk8pi4/s200/ddddddddddddddddddddddddddddddddddd.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5273923036502548226" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मैने सोचा था कि इक रोज मेरी भी बुत बने &lt;br /&gt;मैं किसी मंदिर में रहूं लोग मेरे दर को चूमें&lt;br /&gt;मैं जो हर बुत से कभी मांग कर पाया ही नहीं&lt;br /&gt;दे दूं हर वो चीज कि सभी लोग खुशी से झूमें&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मगर मैं आज बुत हूं मेरे पास लोग आते हैं&lt;br /&gt;न जाने कैसी-कैसी फरियाद मेरे दर पर वो फरमाते हैं&lt;br /&gt;अब समझा हूं कि आसान कितना है किसी से मांग लेना&lt;br /&gt;दर पर प्रसाद चढ़ाकर बड़ा वरदान लेना&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;भिखारी बन कर मैं गुजार लूंगा जिंदगी अपनी&lt;br /&gt;बहुत मुश्किल है मेरे दोस्त यहां भगवान बनना &lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-7895906540708463508?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/7895906540708463508/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=7895906540708463508' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/7895906540708463508'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/7895906540708463508'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2008/11/blog-post.html' title='बनना नहीं भगवान'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/STC9Dyt73wI/AAAAAAAAABs/dJdf6Sk8pi4/s72-c/ddddddddddddddddddddddddddddddddddd.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-6173196910097638286</id><published>2008-10-12T08:17:00.000+05:30</published><updated>2008-10-14T13:20:35.843+05:30</updated><title type='text'>' रिंकी और रिंकू का साथ '</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SPQlz_alXdI/AAAAAAAAABU/NVqh6eXK4CI/s1600-h/gay%2520boys.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SPQlz_alXdI/AAAAAAAAABU/NVqh6eXK4CI/s320/gay%2520boys.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5256868240174702034" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पिछले कुछ दिनों से मैं बहुत परेशान हूं…दुनिया भर में आर्थिक तंगी है...बावजूद इसके हमारी सरकार सबके लिए कुछ न कुछ कर रही है....पर मेरे लिए कुछ हो ही नहीं रहा है....वैसे मुझे इस बात की तकलीफ कम है कि मेरे लिए कुछ नहीं हो रहा है...इस बात का गम ज्यादा कि दूसरों पर मेहरबानी होती जा रही है....छठे वेतन आयोग की सिफारिशे लागू कर दी गईं....कर्मचारियों के लिए दिवाली के बोनस का ऐलान हो रहा है....क्रीमीलेयर की सीमा भी बढ़ा दी गई....रिजर्वेशन कोटे की सीटों को खाली रखने का फरमान लागू हो गया....लेकिन इनमे से किसी दायरे में मैं नहीं आता..सो मैं तो अपने आपको ठगा सा ही महसूस कर रहा हूं...लेकिन पिछले एक हफ्ते से मैं काफी खुश हूं..देर से ही सही सरकार को हमारी सुध आ गई...और कुछ दया दृष्टि हम पर भी होने वाली है....हांलाकि अभी इन खुशखबरियों पर कुछ जलने वाले लोगों को ऐतराज है...लेकिन साथ देने वालों के रुख से तो लग रहा है कि अंत में खुशखबरी मिल ही जाएगी....अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कौन सी खबर है जिसने मुझे इतना खुश कर दिया कि मुझे दूसरों की खुशी से भी जलन नहीं हो रही है....तो सुनिए...सरकार अब कानून बनाने जा रही है...जिसके तहत हम असली आजादी पा सकेंगे...मतलब कि अब हम ' रिंकी और रिंकू ' दोनो के साथ कानूनन रह सकते हैं... इशारा तो आप समझ ही गए होंगे...विस्तार से बताता हूं...पहली खबर है समलैंगिकता को मान्यता देने की....यानि 'रिंकू' अब मेरे साथ रह सकता है...बिना किसी संकोच के...मामले पर बहस शुरु हो गई है...लेकिन कुछ लोग अभी भी इसके विरोध में लगे हैं.. उनको हमारी खुशी देखी नही जा रही है...उनको क्या मालूम साथ रहने का सुख....लेकिन गलती उनकी नहीं है...उम्र का तकाजा है....साठ के बाद इंसान सठिया ही जाता है...हम लोगों को उनकी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए...जेनरेशन गैप तो होता ही है...समझाबुझा लिया जाएगा...एक झटके में इतने बड़े झटके से तो इंसान झटक ही जाता है....लेकिन हम आशन्वित हैं...आखिर कुछ नई सोच के लोगों ने हमारा झंडा जो थाम रखा है...हमें उम्मीद ही नहीं यकीन है कि रामदौस जी अबकी तो जंग जीत ही जाएंगे...हम जैसे लाखों लोगं की दुआएं उनके साथ हैं....वैसे हम लोगों के जंग जीतने की एक वजह यह भी है कि इसका विरोध करने वालो के पास कोई आधार नहीं है...भारतीय संस्कृति और सभ्यता को आधार बनाकर कब तक लड़ेंगे...अरे भाई...मॉर्डनाइजेशन भी कोई चीज होती है कि नहीं....दुनिया तरक्की कर रही है...और आप संस्कृति का रोना रो रहे हैं....अरे इसको लागू तो करिए धीरे-धीरे यही आपकी संस्कृति हो जाएगी....और इसमें गलती तो हम लोगों की है नहीं.. इसको बढ़ावा तो आप ही लोगों ने दिया है...घर से लेकर बाहर तक, जहां गए...लड़को को लड़कों के साथ रख दिया...लड़कियों को लड़कियों के साथ  रख दिया...ऐसे मौके पर भावनाएं जागी और तोड़ गईं सारे बंधन ...पहले कुछ झिझक तो जरुर हुई, लेकिन अब तो आदत बन गई है औऱ मजबूरी भी....अब आप रोक लगाने की बात करोगो तो बगावत तो करुंगा ही....तभी थोड़ी सी समझदारी दिखाए होते ...और लड़के – लड़की में भेद ना किए होते ...तो यह दिन देखना ही क्यों पड़ता...अब तो भईया हम नहीं मानेगें...अंबुमणि जी बेस्ट ऑफ लक.....&lt;br /&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SPFltw9IR7I/AAAAAAAAABM/2y3ILH8mRAs/s1600-h/salam_namaste%5B1%5D.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SPFltw9IR7I/AAAAAAAAABM/2y3ILH8mRAs/s320/salam_namaste%5B1%5D.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5256094077027895218" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अब बताते हैं आपको दूसरी खुशखबरी....जो बहुत खास है...और हमारी आजादी की तरफ बढ़ा एक और कदम....एक ऐसा कानून बनने जा रहा है...जो हमें वास्तव में सारे बंधनों से आजाद कर देगा  और हम गर्व से कह सकेगें 'मेरी मर्जी'....मैं चाहे ये करुं...मैं चाहे वो करुं....मेरी मर्जी....न समाज का बंधन...न कानून का बंधन...न पंडित...न कोर्ट...न कचहरी...न पुलिस...न थाना...सबसे आजाद....किसी के साथ रहो...'पिंकी के साथ या रिंकी के साथ'....सरकार को कोई वास्ता नहीं...विवाह जैसे बोरियत भरे रस्म से भी आजादी ...और बिना मतलब के होने वाले खर्चों से भी आजादी...लेकिन दुश्मनों की कोई कमी तो होती नहीं है...सो हमारी यह खुशी भी उनको बर्दाश्त नहीं हो सकी...करने लगे मीन मेख....फिर वही संस्कृति और सभ्यता का रोना....अरे मार्डन बनो भाई मार्डन....कुछ देश तो इतने मार्डन हैं कि उनकी आधी आबादी ही हम जैसों की उपज है....न मां का पता ....न बाप का ठिकाना....जब जिसे चाहा मां बना लिया ...जिसे चाहा बाप कह दिया....इसको कहते हैं एकता...सारा देश अपना है ...और हम सारे देश के हैं.....लेकिन विरोधियों का हमें कोई डर नहीं है....विरोधी है, विरोध करना उनका अधिकार है....यहां तो हमको शिकायत महाराष्ट्र सरकार से है...मंजूरी तो दे दी...लेकिन छोड़ दिया थोड़ा सा नुख्स...कह दिया पर्याप्त समय तक साथ रहने वालों को ही मान्यता है...अब पर्याप्त क्या होता है भाई....हर इंसान के लिए पर्याप्त की परिभाषा अलग अलग है...सबकी अपनी-अपनी क्षमता है...अपनी –अपनी सोच है...और जिंदगी में सब कुछ हमारी सोच ही डिसाइड कराती है....अब कुछ लोग अपनी एक ही जिंदगी से त्रस्त हैं...बिचारे समझ ही में नहीं आ रहा है...कि जी रहे हैं कि मर रहे हैं...और एक मैं हूं... सोचता हूं ....इसी जिंदगी में कई जिंदगियां जी लूं....कई जिंदगी जीने के लिए कई लोगों का साथ होना भी जरुरी है....और जब एक ही के साथ पर्याप्त समय बिताने लगेंगे तो कई जिंदगियों का क्या होगा...और ऊपर से एक और संकट है...मान जाइए एक के साथ ही कुछ लंबे अरसे तक सेटलमेंट कर भी लें ...और अचानक वो बिदक गई तो...हम कहां जाएंगे...रोक तो सकते नहीं ...न समाज का वास्ता देकर और न ही कानून का डर दिखाकर.... तो हम तो आ गए सड़क पर...लंबा समय जब एक ही के साथ गुजार लेंगे ....और हो जाएंगे उम्र दराज..तो इस ढ़ांचे को घास कौन डालेगा....तो मेरा तो यही सुझाव है कि इसमें थोड़ी सी फ्लैक्सीविलिटी की जरुरत है...लेकिन कुल मिलाकर मैं खुश हूं....और सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा और उनको भी मुबारकबाद जो एक साथ रहना चाहते हैं ' रिंकी और रिंकी के साथ'&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-6173196910097638286?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/6173196910097638286/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=6173196910097638286' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6173196910097638286'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6173196910097638286'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2008/10/blog-post_11.html' title='&apos; रिंकी और रिंकू का साथ &apos;'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SPQlz_alXdI/AAAAAAAAABU/NVqh6eXK4CI/s72-c/gay%2520boys.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-1043858205019799902</id><published>2008-10-05T12:08:00.000+05:30</published><updated>2008-10-05T13:21:13.151+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ख़ालिस बकैती'/><title type='text'>फरमान लागू है... जरा बच के</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOhjekuPE-I/AAAAAAAAAA8/TBWmkXuqD2A/s1600-h/danger.png"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://4.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOhjekuPE-I/AAAAAAAAAA8/TBWmkXuqD2A/s320/danger.png" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5253558342232511458" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;विश्व अहिंसा दिवस से एक फरमान लागू है ' सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान वर्जित है'....पकड़े गए तो जुर्माना...लोग डरें या ना डरें, मैं तो डरा हुआ हूं....&lt;strong&gt;एक छोटी सी सिगरेट...और दाम दो सौ रुपए&lt;/strong&gt;...सोच कर ही पर्स पतला हुआ जाता है....बजाए जुर्माने के अगर एक सिगरेट की कीमत ही दो सौ हो जाए तब शायद फर्क नहीं पड़ता...लेकिन क्यां करें जुर्माने से गुनाह का एहसास होता है....और हम जैसा कानून की इज्जत करने वाला इंसान गुनाह से कोसों दूर रहना चाहता है...लेकिन मजबूरी है कि सिगरेट चूमने की आदत सी हो गई है....लाख कोशिशों के बाद भी छूटती ही नहीं...हरिबंश राय बच्चन को अपनी मधुशाला से जो लगाव रहा होगा...वैसा ही लगाव मुझे सिगरेट से है....अंतर सिर्फ इतना है कि उनका लगाव शाब्दिक था...और मेरा आत्मिक... अब सिगरेट पीता हूं तो मरुंगा भी...&lt;strong&gt;हांलाकि मौत तो सबको आनी है...लेकिन हम सिगरेटचियों को सूचित करके आती है&lt;/strong&gt;....अब सूचना के बाद भी तैयारी न हो तो ठीक बात नहीं...सो मैने शुरू कर दी है अपने क्रिया कर्म की तैयारी भी....बस एक ही इच्छा है, मेरी चिता के लिए चंदन की लकड़ियों को तकलीफ न मिले क्योंकि जलना उनकी फितरत नहीं...मजबूरी में जला दी जाती हैं....अगर जलना ही है तो सिगरेट जले ...जो जलती भी है...और जिसके जलने से सरकार भी जल रही है....लेकिन सरकार करे भी तो क्या करे...उसकी और मेरी तकलीफ कमोवेश एक जैसी है....उसे भी सिगरेट से कोई दुश्मनी नहीं है....नफरत तो कमबख्त उस धुंए से है...जो लोगों का नाश कर रही है....अगर धुंआ नहीं होता तो इस प्रतिबंध से शायद बचने में आसानी होती....अरे भई ! शराब बच गई न...क्योंकि उसको पीने में धुआं नहीं निकलता...सिगरेट के धुंए से मेरी भी शिकायत है...कई बार रंगे हाथों पकड़ा गया हूं....खुद को तो छिपा लेता हूं, लेकिन ये धुंआ है न, रास्ता बना ही लेता है....&lt;br /&gt;लेकिन जो हुआ सो हुआ...अब उस पर सिर फोड़ने से क्या फायदा...&lt;strong&gt;क्या हो गया इस पर बहस करने से अच्छा होगा कि क्यों हुआ इस पर बहस किया जाए...क्योंकि वहीं से कुछ सामाधान निकलने की संभावना है....&lt;/strong&gt;बहुत सोचने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि ये कैंसर – वैसर होने का जो डर सरकार को है, वो तो बहाना भर है...असली सच्चाई तो कुछ और ही है....और वह है रुपईय्या....सरकार रोज ही कमाई के नए – नए तरीके खोज रही है....सारे मंत्रालय अपना खजाना भर रहे हैं....लालू का मंत्रालय तो आप देख ही रहे हैं....अब इस सिगरेट-बीड़ी से सरकार को आमदनी तो बहुत होती है...लेकिन केवल उसी के भरोसे रहने सो तो काम चलेगा नहीं....एक बात तो आपको मालूम ही है कि एक अच्छा शासक वो है जो अपने राज्या की सीमा को कम न होने दे, लेकिन जो शासक अपनी सीमाओं को बढ़ा दे वो तो महान ही कहा जाएगा न...सो हो गए हमारे शासक लोग भी महान...बढ़ा ही लिया कमाई का तरीका....सिगरेट तो बिकेगी ही...पकड़े गए तो जुर्माने की रकम भी खजाने में....&lt;br /&gt;अब सवाल यह है कि हम क्या करें....जुर्माने की वजह से खुलेआम सिगरेट पीना दूभर हो गया है...पकड़े जाने के डर में ही एक सिगरेट खत्म हो जाती है...असली चिंता के लिए दूसरी जलानी पड़ती है...अब सहन नहीं होता....इस तरह कायरों की जिंदगी जीना...अब सरकार के प्रतिनिधियों से बात करनी ही पड़ेगी...मेरे पास वक्त थोड़ा कम है...इसलिए यहीं पर अपनी बातें बता दे रहा हूं...सरकारी नुमाइंदे ध्यान दें......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पहले यहां हम यह क्लीयर कर दें कि सरकार किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर हमारी बात न समझे...&lt;strong&gt;सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाना हमारा मकसद नहीं है&lt;/strong&gt;...हम तो सब कुछ व्यवस्थित चाहते हैं...कुछ बातें मान लें...आप भी खुश हम भी खुश....&lt;br /&gt;1. सिगरेटचियों से वसूली जाने वाली रकम को जुर्माना न कहा जाए....बल्कि इसे स्वास्थ्य सहयोग राशि कही जाए&lt;br /&gt;2. नियमित रूप से सिगरेट पीने वालों को उनकी राशि में छूट का प्रावधान हो&lt;br /&gt;3. पेमेंट करने के मोड में भी फ्लैक्सीविलटी हो...मसलन चेक, कार्ड, ड्राफ्ट आदि&lt;br /&gt;4. रेलवे, बस और मैट्रो की ही तरह सिगरेट पीने वालों को भी वनडे, वीकली और मंथली पास इश्यू किया जाए&lt;br /&gt;5. पास बनाने के लिए अलग से काउंटर खोले जाएं, जिससे हमें भीड़ का सामना न करना पड़े&lt;br /&gt;6. स्वेच्छा से सहयोग करने वालों को मंत्रालय की तरफ से कुछ बोनान्जा ऑफर मिले.&lt;br /&gt;7. &lt;strong&gt;बसों में महिला, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और सीनियर सीटिजन की ही तरह सीट आरक्षित हो, जिस पर साफ- साफ लिखो हो केवल "वेटिंग फॉर डेथ" के लिए &lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;8. ट्रेनों के रिजर्वेशन में भी कुछ ऐसी ही सुविधाए उपलब्ध कराई जाएं...&lt;br /&gt;शेष ठीक है... हम सहयोग के लिए वचनबद्ध हैं....जो हमारे बच्चे निभाएंगे....मामला नया है, इसलिए लागू होने के कुछ दिन बाद इसके और लूप होल सामने आएंगे...इसलिए हर दो महीने पर द्विपक्षीय वार्ता अपेक्षित है....&lt;br /&gt;धन्यवाद&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;वैद्धानिक चेतावनी : सिगरेट/बीड़ी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है&lt;/strong&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-1043858205019799902?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/1043858205019799902/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=1043858205019799902' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1043858205019799902'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/1043858205019799902'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2008/10/blog-post_04.html' title='फरमान लागू है... जरा बच के'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOhjekuPE-I/AAAAAAAAAA8/TBWmkXuqD2A/s72-c/danger.png' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7527489638034661446.post-6738712967050385551</id><published>2008-10-04T08:24:00.000+05:30</published><updated>2008-10-05T12:35:31.728+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='ब्लॉग'/><title type='text'>बंधुओं क्षमा प्रार्थी हूं</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SObbjwqnb_I/AAAAAAAAAAo/k7lKGpPIzXE/s1600-h/atul.bmp"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;" src="http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SObbjwqnb_I/AAAAAAAAAAo/k7lKGpPIzXE/s320/atul.bmp" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5253127422779813874" /&gt;&lt;/a&gt;...उन लोगों से जो इस विषय को सार्थक मानते हैं....और उनसे भी जो समझते हैं कि यह विषय निरर्थक है....सार्थक वालों से इसलिए कि इस बहस में मैं देर से क्यों आया....और निरर्थक वालों से इसलिए कि इस बहस में मैं आया ही क्यूं... वैसे मेरी व्यक्तिगत राय भी &lt;a href="http://batkahee.blogspot.com/2008/09/blog-post_1285.html"&gt;&lt;strong&gt;सचिन जी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt; की ही तरह है...जहां दिल और दिमाग दोनों में ही द्वंद है.... &lt;br /&gt;मैं ब्लॉग नहीं लिखता...लेकिन जबसे यह प्रश्न ब्लॉग बाजार में आया है..अचानक लोगों की लेखन क्षमता तेज हो गई है...सारे समझदार लोग इस विषय पर लिख रहे हैं...और आपस में बातें करके यह बता रहते हैं कि जिसने नहीं लिखा उसकी कोई सोच नहीं है..मतलब कि उसके अंदर सोचने की ताकत नहीं है...तो मैं सिर्फ इसलिए लिख रहा हूं कि लोग समझ सकें कि मैं भी सोचता हूं...और समझदार भी हूं...वैसे इस विषय पर लिखने की अंतिम प्रेरणा मुझे मेरे ऑफिस में काम करने वाले एक शख्स से मिली...जो तबियत खराब होने की वजह से ऑफिस नहीं आ पाए...लेकिन ऑफिस टाइम खत्म होने के चंद घंटे पहले ऑफिस में उजागर हुए...और अपने ब्लॉग धर्म का बखूबी पालन किया...तब तो मुझे यकीन हो गया कि यह काम सिर्फ महान लोगों का ही है...सो पेश है मेरी महानता..... &lt;br /&gt;मैं बिहार से सटा उत्तर प्रदेशी हूं&lt;br /&gt;...पर बिहार के तिलिस्म से अभी भी अपरिचित सा ही हूं....लेकिन जितना समझ पाया हूं, वह यह कि जब तक मैं अपने प्रदेश में रहा ' बिहारवाद ' बिहार में रहने वाले लोगों के पक्ष या विपक्ष की बात थी...लेकिन जबसे दिल्ली में हूं इस वाद से अपने आपको अलग नहीं पाता हूं...इच्छा हो या न हो अपने आपके बिहारियों से अलग नहीं पाता हूं....ज्यादा भीतर तक न जाएं तो यहां पश्चिम को छेड़कर सारे यूपी वाले बिहारी हैं....लोग यह कह सकते हैं कि यूपी, एमपी, राजस्थान वाले अपना वाद नहीं चलाते...मैं मानता हूं कि यह कुछ हद तक सही है....लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि हमारे अंदर यह सोच है ही नहीं...बल्कि हम सभी के अंदर यह बात पलती है कि ' अपने घर में दिया जलाके दूसरे घर में उजाला कईल जाला '... लेकिन हम अपनी ही कब्र खोदने में लगे हैं...तो ऐसा कैसे संभव है...मैने कल ही दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग का एक विज्ञापन पढ़ा, जिसमें लिखा था..." एकता में शक्ति है, आपस में बं ट ने से ह म टू ट जा एं गे"...हम शायद आज भी एक नहीं हैं और अगर बिहार में यह एकता है तो इससे चिढ़ने की जरुरत नहीं है....हम तो चाहते हैं कि सारा प्रदेश अपना अपना वाद चलाए...कम से कम प्रदेश में तो एकता होगी...जिस दिन हम प्रदेश वासी आपस में एक होने का हुनर सीख जाएंगे...सारा देश एक हो जाएगा... क्योंकि जैसे जैसे हम अपनी सीमाओं से दूर होते हैं...शायद एक होते हैं...दिल्ली के उपराज्यपाल तेजेंद्र खन्ना ने जब कहा कि बिहार और यूपी वाले अनुशासनहीन होते हैं, तो हर यूपी वाला बिहार के साथ खड़ा दिखा......जब राज ठाकरे ने कहा कि उत्तर भारतीयों मुंबई छोड़ो, तब सारा उत्तर भारत बिहार के साथ खड़ा दिखा....और जब सायमंड्स ने हरभजन पर आरोप लगाए तब पूरा देश एक साथ खड़ा दिखा... &lt;br /&gt;तो बिहारवाद ही क्यों चलिए भारतवाद पर बहस करते हैं... बिहारवाद के पक्ष और विपक्ष में बहस करते करते दोनों ही खेमे के लोगों ने अपनी स्वतंत्रता की सीमा का उल्ल्घंन करके स्वच्छंदता को अपना लिया...जो मेरी राय में ठीक नहीं है....एक सज्जन ने तो यहां तक लिखा कि "...............से बच्चा पैदा नहीं होता "....अरे भाई ये तो सबको मालूम हो कि ऐसा नहीं होता....तो क्या आपकी बात सिर्फ इसलिए मान ली जाए कि आपने उसी तरह से बच्चा पैदा करने की कोशिश की और नाकाम रहे....और आप भुक्तभोगी हैं इसलिए आपकी बात प्रामाणिक है...तो चलिए मान लिया कि ......लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल इस पैदाइशी तरीके पर इनको ही संदेह है....उनका जबाब देने वालों ने तो इसके प्रचार और प्रसार की पूरी जिम्मेदारी का ही लबादा ओढ़ लिया है....और वहां तक उतर आए हैं जो इन सभी लोगों की सतही लड़ाई को उजागर कर रही है....&lt;br /&gt;भाई सारी बातें बलॉग पर ही डाल देंगे ?.....सामने खड़े होकर भी बात की जा सकती है....निपट लीजिए ...खास को आम करने की क्या जरुरत है....&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7527489638034661446-6738712967050385551?l=renukoot.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://renukoot.blogspot.com/feeds/6738712967050385551/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=7527489638034661446&amp;postID=6738712967050385551' title='9 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6738712967050385551'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7527489638034661446/posts/default/6738712967050385551'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://renukoot.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='बंधुओं क्षमा प्रार्थी हूं'/><author><name>अतुल राय</name><uri>http://www.blogger.com/profile/07036600721746088024</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='24' height='32' src='http://1.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SOWImg5_ueI/AAAAAAAAAAM/L-4_wwvQ16I/S220/Z1si1cb2%5B1%5D.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_XnK3OIgxxHY/SObbjwqnb_I/AAAAAAAAAAo/k7lKGpPIzXE/s72-c/atul.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>9</thr:total></entry></feed>
